एक जर्रा था जो आफताब बन गया
वो इंसा मेरे लिए खुदा बन गया
इबादत -ऐ -इश्क में रुसवा बहुत हुए
मेरा हमनशी मेरा रकीब बन गया
रंज है वो राज -ऐ -उल्फत न समझा
दिल है की उस बेवफा का बन गया
तू रहे शाद ये तमन्ना है मेरी
मेरा हर गम-ऐ-खवाब हकीकत बन गया
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