यादों में कितनी कसक है
ये जानती न थी मैं
तेरी नजर में कितना असर था
पहचानती न थी मैं
गुजरे हुए लम्हों को सहेजे हूँ मैं
तेरी यादों को समेटे हूँ मैं
उस पल तू कितना करीब था
ये जानती न थी मैं
तुझे हमसफ़र जान लिया मैने
अपनी वफ़ा का सिला भी पा लिया मैने
तू मेरे दिल का रकीब था
ये जानती न थी मैं
तुझको मुबारक हों जफ़ाएं तेरी
हमने ख़ुद अपने नशेमन को जलाया है
तू फकत एक खवाब था
ये जानती न थी मैं
यादों मैं कितनी कसक थी
जानती न थी मैं
तेरी नजर मैं कितना असर था
पहचानती न थी मैं
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