Friday, December 26, 2008

यादों में कितनी कसक है

ये जानती न थी मैं

तेरी नजर में कितना असर था

पहचानती न थी मैं

गुजरे हुए लम्हों को सहेजे हूँ मैं

तेरी यादों को समेटे हूँ मैं

उस पल तू कितना करीब था

ये जानती न थी मैं

तुझे हमसफ़र जान लिया मैने

अपनी वफ़ा का सिला भी पा लिया मैने

तू मेरे दिल का रकीब था

ये जानती न थी मैं

तुझको मुबारक हों जफ़ाएं तेरी

हमने ख़ुद अपने नशेमन को जलाया है

तू फकत एक खवाब था

ये जानती न थी मैं

यादों मैं कितनी कसक थी

जानती न थी मैं

तेरी नजर मैं कितना असर था

पहचानती न थी मैं

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